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Bihar News: बिहार टेंडर घोटाले में ED की जांच तेज, सात IAS अधिकारियों को समन की खबर से हलचल

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार के कथित टेंडर घोटाले में ED की जांच, सात IAS अधिकारियों को समन भेजे जाने की खबर और पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी से जुड़ी पूरी जानकारी।

27 अक्टूबर 2026, पटना: बिहार में सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले ने नया मोड़ ले लिया है। ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री से जुड़े प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका तक पहुंचने की चर्चा है। सात IAS अधिकारियों को समन भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इससे सरकारी ठेकों की प्रक्रिया, कथित मिलीभगत और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।


इस मामले में 15 अक्टूबर को पटना हाईकोर्ट ने ED और बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने टिप्पणी की थी कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर रिशु श्री मुख्य सूत्रधार के बजाय एक मोहरा प्रतीत होता है और मामले में अन्य प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी पड़ताल होनी चाहिए। <Cite refs={["turn792575search0","turn792575search1"]}/>


हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद जांच पर बढ़ा ध्यान


रिशु श्री की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सत्यव्रत वर्मा की एकलपीठ ने सवाल उठाया कि जब ED ने छह वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बारे में जानकारी साझा की थी, तो उनमें से केवल तीन के खिलाफ SVU की प्राथमिकी में कार्रवाई क्यों हुई।


अदालत ने जांच की प्रगति पर असंतोष जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोगों को बचाने और कुछ को आरोपित बनाने की कोशिश हो रही है। यह अदालत की जांच प्रक्रिया पर टिप्पणी थी, किसी अधिकारी के दोषी होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं।


हाईकोर्ट ने SVU के अपर पुलिस महानिदेशक को मामले में पक्षकार बनाने और हलफनामा दाखिल कर अधिकारियों की भूमिका तथा अब तक हुई कार्रवाई का विवरण देने का निर्देश भी दिया। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। <Cite refs={["turn792575search1","turn792575search3"]}/>


सात IAS अधिकारियों को समन भेजे जाने की चर्चा


मामले से जुड़ी खबरों के अनुसार, ED ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन जारी किए हैं। इनमें अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। एक अधिकारी के सेवानिवृत्त होने की भी जानकारी दी गई है।


जांच का उद्देश्य यह समझना है कि सरकारी विभागों के टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताओं के दौरान अधिकारियों और ठेकेदार से जुड़े लोगों के बीच किस तरह के संपर्क थे। हालांकि, सात अधिकारियों को समन भेजे जाने से संबंधित सभी विवरणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे जांच से जुड़ी रिपोर्ट के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


सरकारी टेंडर और गोपनीय जानकारी लीक करने के आरोप


यह मामला रिशु श्री से जुड़ी कंपनी रिलायबल इन्फ्रा सर्विस प्राइवेट लिमिटेड और सरकारी विभागों के ठेकों से संबंधित है। जांच एजेंसियों के आरोपों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर कर ठेके हासिल करने और सरकारी अधिकारियों से संपर्क के जरिए अनुचित लाभ लेने की आशंका है।


आरोप यह भी है कि टेंडर से संबंधित गोपनीय तकनीकी जानकारी पहले ही हासिल कर ली जाती थी, जिससे कुछ कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में फायदा मिल सकता था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या किसी अधिकारी ने नियमों के विरुद्ध जानकारी साझा की या ठेकों की शर्तें किसी खास कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए प्रभावित की गईं।


इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी।


मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल


मामले की जांच में डिजिटल उपकरणों, संपर्कों और संभावित वित्तीय लेनदेन की जानकारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ठेकेदार से जुड़े मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के दौरान सरकारी अधिकारियों के साथ संपर्क के संकेत मिलने की बात सामने आई थी।


ED कथित धनशोधन के पहलू की जांच कर रही है, जबकि SVU सरकारी टेंडरों में कथित हेराफेरी और भ्रष्टाचार से संबंधित आरोपों की पड़ताल कर रही है। दोनों एजेंसियों की जांच में सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट हो सकता है कि कथित नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी। <Cite refs={["turn792575search3","turn792575search10"]}/>


पहले भी हुई कार्रवाई, आरोपपत्र दाखिल


इस मामले में विशेष निगरानी इकाई ने जून 2026 में सात लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें IAS अधिकारी संजीव हंस सहित अन्य लोगों के नाम शामिल बताए गए थे। इससे पहले मामले में दो IAS अधिकारियों को निलंबित किए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। <Cite refs={["turn792575search6","turn792575search11"]}/>


जांच एजेंसियों को अब कथित टेंडर हेराफेरी, अधिकारियों के संपर्क और संभावित आर्थिक लेनदेन के बीच संबंध स्थापित करना होगा। केवल संपर्क या बातचीत सामने आना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता; इसके लिए संबंधित साक्ष्यों और उनकी कानूनी जांच आवश्यक है।


अब आगे क्या?


पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद ED और SVU की जांच पर निगाहें टिकी हैं। आने वाले समय में पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों और SVU के हलफनामे से मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।


फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि सरकारी टेंडरों में कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और क्या किसी अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग कर किसी ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया। इन सवालों का जवाब जांच एजेंसियों की पड़ताल और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से ही मिलेगा। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आरोपों को तब तक सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता, जब तक कानूनी प्रक्रिया में उनकी पुष्टि न हो जाए।


यह भी पढ़ें: बिहार की अन्य प्रमुख खबरें पढ़ने के लिए Alam Ki Khabar की वेबसाइट पर जाएं।

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